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बूंद भर खुशबू
बूंद भर खुशबू हर त्योहार दादी संदूक से एक छोटी -सी इत्र की शीशी निकालती। उंगली पर बस एक बूंद लगाती और शीशी वापस रख देती। मैं हंस कर पू...
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इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
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न करना गुमान कामयाबी का चढता सूरज ढलते देखा । बुझ गया हो दीप न डरना प्रयासों से फिर जलते देखा । हीरा पड़ा रह जाता कई बार ...
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सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...

सुन्दर।
जवाब देंहटाएंBahut achha likha hai.
जवाब देंहटाएंबहुत ख़ूब
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना।
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