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शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

ईद का मेला....मुकेश श्रीवास्तव


ईद के मेले में
खिलौनों की दुकान तो थी
पर इस बार 
मिट्टी का सिपाही
अपनी बंदूक के साथ गायब था
और मिट्टी का भिश्ती भी 
अपनी मशक के साथ वहाँ नहीं था
लिहाज़ा दुकानदार
प्लास्टिक के नेता, बंदूक और तोप
लेकर हाज़िर था
हामिद के एक दोस्त ने 
बंदूक खरीदी वह लादेन बनना चाहता था
और दूसरे ने नेता का पुतला खरीदा
वह प्रधानमंत्री बनना चाहता था
पर हामिद तो अभी तक
लोहे का चिमटा ढूँढ रहा था
ताकि उसकी बूढ़ी माँ की 
काँपती उंगलियाँ
आग में न जलें
-मुकेश श्रीवास्तव

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

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