सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
तही ज़िन्दगी से नहीं ये फ़ज़ायें
यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं
कना'अत न कर आलम-ए-रन्ग-ओ-बु पर
चमन और भी, आशियाँ और भी हैं
अगर खो गया एक नशेमन तो क्या ग़म
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुगाँ और भी हैं
तू शहीं है पर्वाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आस्माँ और भी हैं
इसी रोज़-ओ-शब में उलझ कर न रह जा
के तेरे ज़मीन-ओ-मकाँ और भी हैं
गए दिन की तन्हा था मैं अंजुमन में
यहाँ अब मेरे राज़दाँ और भी हैं
मायने:
तही : तनहा/खाली, फ़ज़ायें : माहौल/मौसम,
कना'अत : खुश होना/सतुष्ट होना ,
आलम-ए-रन्ग-ओ-बु : खुशबु और रंग का जहां,
नशेमन : घौसला, मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुगाँ : रोने या शांत होने की एक जगह,
ज़मीन-ओ-मकाँ : समय के रास्ते
