चल सखी उम्मीद का
दीपक जलाते हैं
हम हम कदम हम राह बनकर
मुस्कुराते हैं
न जाने कितने ख्वाब और
अरमाँ हैं इस दिल में
चल वही अरमाँ
तेरे दिल में बसाते हैं
कुछ भी नही है पास
शब्दों के सिवा मेरे
ओठों पे बस जाएं
उन्हें ऐसे सजाते हैं
खो न जायें हम कहीं
दुनिया की भगदड़ में
एक नई पहचान
दुनिया में बनाते हैं
- नीतू ठाकुर
