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सोमवार, 26 मार्च 2018

बनबाला के गीतों सा.....महादेवी वर्मा...

26 मार्च 1907-11 सितम्बर 1988
छायावाद की एक प्रमुख स्तम्भ 
पद्म विभूषण महादेवी वर्मा 
की जयंती के अवसर पर 
उन्हें शत शत नमन और श्रद्धाजंलि।

प्रस्तुत है उनकी एक रचना
बनबाला के गीतों सा
निर्जन में बिखरा है मधुमास,
इन कुंजों में खोज रहा है
सूना कोना मन्द बतास।

नीरव नभ के नयनों पर
हिलतीं हैं रजनी की अलकें,
जाने किसका पंथ देखतीं
बिछ्कर फूलों की पलकें।

मधुर चाँदनी धो जाती है
खाली कलियों के प्याले,
बिखरे से हैं तार आज
मेरी वीणा के मतवाले;

पहली सी झंकार नहीं है
और नहीं वह मादक राग,
अतिथि! किन्तु सुनते जाओ
टूटे तारों का करुण विहाग।


एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

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