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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

उदास नज़्म............सीमा ‘असीम’ सक्सेना

जब कभी उकेर लेती हूँ तुम्हें 
अपनी नज़्मों में !

आँसुओं से भीगे 
गीले, अधसूखे शब्दों से!!

सूख जायेंगी गर कभी 
वे उदास नज़्में!

सबसे पहले सुनाऊँगी 
या दिखाऊँगी!! 

सच में गीली हैं 
अभी तो!
वाकई बहुत भीगी भीगी सी 
न जाने कैसे सूखेंगी???

इस गीले मौसम को भी 
अभी ही आना था?

-सीमा ‘असीम’ सक्सेना

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