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बुधवार, 26 अगस्त 2026

एक बकरा और एक घोड़ा

एक पठान के पास एक बकरा और एक घोडा था।
जिन्हें वो बहुत प्यार करता था।  



एक बार अचानक घोडा बीमार पड़ गया और बैठ गया। वो अब चल फिर नहीं सकता था।
पठान को इस बात की बड़ी चिंता हुयी। उसने घोड़े के इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया।

डॉक्टर ने जांच पड़ताल करने के बाद पठान को बताया कि....

“आपके घोड़े को बहुत खतरनाक बीमारी हुयी है। 
मैं इसे 4 दिन लगातार दवाई दूंगा। 
अगर ये चौथे दिन तक खड़ा हो गया तो बच जाएगा। 
यदि यह चौथे दिन तक खड़ा न हुआ तो मजबूरन इसे मारना पड़ेगा।”

यह सुन कर पठान को बहुत दुःख हुआ। 
लेकिन वह कर भी क्या सकता था।

डॉक्टर के जाने के बाद बकरे ने घोड़े को समझाने की कोशिश की।

“देखो, तुम कल एक बार जब डॉक्टर आये तो 
उठ जाना। वर्ना वो तुम्हें मार देंगे।”

लेकिन घोड़े पर इस बात का कोई असर न हुआ। 
वह दूसरे दिन न उठा। 
बकरे ने उसे दूसरे दिन भी समझाया। 
पर घोडा तो जैसे कान में रूई डाले बैठा था।

तीसरे दिन डॉक्टर फिर आया। 
उसने देखा कि घोड़ा फिर से खड़ा नहीं हुआ।

“बस एक दिन और अगर यह न खड़ा हुआ तो कल इसका आखिरी दिन होगा।”

इतना कह कर डॉक्टर चला गया।

तब बकरे ने एक आखिरी कोशिश करनी चाही।

“देखो, मैं तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा हूँ। 
जिन्दगी दोबारा नहीं मिलती। 
तुम्हें ज्यादा कुछ नहीं करना। 
अपनी जान बचने के लिए बस एक बार 
उठ कर दौड़ना है।”

घोड़े ने बकरे की सलाह पर इस बार विचार किया। उसने सोच लिया अगर एक बार
हिम्मत करने से जान बच सकती है तो क्यों न कोशिश कर ली जाए।

अगले दिन डॉक्टर आया और जैसे ही घोड़े के पास गया तो घोड़ा अचानक से
उठा और दौड़ने लगा। 
डॉक्टर खुश हो गया और बोला,

“बधाई हो, आपका घोड़ा बच गया। 
अब इसे नहीं मरना पड़ेगा।”

यह खबर सुन पठान बहुत खुश हुआ 
और तुरंत बोला....

“डॉक्टर साहब आज खुश कर दिया आपने। 
मैं आज बहुत खुश हूँ और इसी ख़ुशी में 
“आज बकरा कटेगा”!

शिक्षा :- आज के ज़माने में बस 
अपने काम से काम रखिये। 
नहीं तो किसी और को बचाने के चक्कर में 
आप भी बकरे की तरह कट जाओगे।



गुरुवार, 20 अगस्त 2026

बूंद भर खुशबू

 बूंद भर खुशबू

हर त्योहार दादी संदूक से एक छोटी -सी इत्र की शीशी निकालती। 
उंगली पर बस एक बूंद  लगाती और शीशी वापस रख देती। 
मैं हंस कर पूछता 'दादी , इतनी -सी?' वे मुस्कुरी भर देती।
उसके जाने के बाद अलमारी समेटते हुए 
वही शीशी हाथ लगी। 
नीचे एक पुरानी पर्ची दबी थी, पहली तनख्वाह से  इन्होंनें खरीदी थी।

उसी क्षण समझ में आया दादी इत्र नहीं बचा रही थी, 
उस दिन की खुशबू  बचा रही थी, 
जब उनके छोटे-से संसार ने पहली बार महकना शुरू किया था।

उस एक बूँद नें पूरी उम्र की खुशबू सम्हाले रक्खी थी

-जयवीर सिंह , लुधियाना

खुला दरवाजा अपनी निजता में दखल लगता था।

 दरवाजा -हरीश कुमार 'अमित'


खुला दरवाजा अपनी निजता में दखल लगता था। 
वे लोग मेरे घर पर नजर क्यों रख रहे हैं? मुझे यह पसंद नहीं। 
एक दिन कह ही दिया।



सामने वाले फ्लैट में पिछले दिनों जब से नए किराएदार आए थे।मैं परेशान-सा था। वजह यह थी कि उनके फ्लैट का लकड़ी वाला दरवाजा दिल भर खुला रहता था।सिर्फ जाली वाला दरवाजा वे बंद रखते थे। मुझे इससे कोफ़्त होती थी। क्योंकि मुझे लगता था लकड़ी वाला दरवाजा खुला रखकर वे मेरी जासूसी कर रहे हैं, मेरे घर पर कौन-कौन आया और मैंने क्या सामान मंगवाया, उनका खुला दरवाजा देखकर मैं मन ही मन कुढ़ता रहता था।

कई बार जी में आता कि कह दूं अपना दरवाजा बंद रखा करें, मगर फिर 
सोचकर रुक जाता कि वे लोग बुरा मान सकते हैं।या जवाब में यह भी कह सकते हैं 
यह उनकी मर्जी है वे दरवाजा या रखे या बंद।

आखिर एक दिन मैं उनके मुखिया को सुना दिया कि आप लोग लकड़ी वाला दरवाजा पूरे दिन खुला रखते हैं। मेरी बात सुनकर वह कहने लगा 'ऐसा तो हम आपके लिए ही करते हैं'। 

'मेरे लिए ?' मै हैरान थाहां आपके ही लिए तो। आप इस फ्लैट में अकेले रहते हैं।आपकी उम्र लगभग 80 बरस की है, हम अपना दरवाजा इसलिए खुला रखते हैं ताकि यह पता लगता रहे कि कोई गलत इंसान तो आपके यहां नहीं आया आपके कोई परेशानी या दिक्कत तो नहीं और जरूरत पड़ने पर हम आपकी मदद कर सकें
उनका जवाब सुनकर मैं अवाक रह गया कुछ बोल ही नहीं पाया

सही पड़ोसी पहचान ही नहीं पाया

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मेरा सलीका मेरे साथ

मेरा सलीका

भाभी घर छोड़कर जा रही थी
उसने अलमारी में अपनी जगह खाली की 
चाबियां मेज पर रक्खी, मां के लिए दवा रखी,
दरवाजे के पास के बिखरे जूते करीने से रखे 
और जाते-जाते गंदे बर्तन भी धो दिए

दरवाजे खड़े भैया ने पूछा इतनी नाराजगी के बाद ये सब?

रिश्ता छोड़ रही हूं,अपना सलीका नहीं
यह कह कर मुस्कुराते हुए चली गई

-मेहनाज़ मंसूरी

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

  पड़ोसन चीनी मांगने आई… बहू ने मना कर दिया शाम का समय था। आंगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रसोई में नई-नई बहू नेहा रात के खाने की तैयारी ...