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गुरुवार, 20 अगस्त 2026

खुला दरवाजा अपनी निजता में दखल लगता था।

 दरवाजा -हरीश कुमार 'अमित'


खुला दरवाजा अपनी निजता में दखल लगता था। 
वे लोग मेरे घर पर नजर क्यों रख रहे हैं? मुझे यह पसंद नहीं। 
एक दिन कह ही दिया।



सामने वाले फ्लैट में पिछले दिनों जब से नए किराएदार आए थे।मैं परेशान-सा था। वजह यह थी कि उनके फ्लैट का लकड़ी वाला दरवाजा दिल भर खुला रहता था।सिर्फ जाली वाला दरवाजा वे बंद रखते थे। मुझे इससे कोफ़्त होती थी। क्योंकि मुझे लगता था लकड़ी वाला दरवाजा खुला रखकर वे मेरी जासूसी कर रहे हैं, मेरे घर पर कौन-कौन आया और मैंने क्या सामान मंगवाया, उनका खुला दरवाजा देखकर मैं मन ही मन कुढ़ता रहता था।

कई बार जी में आता कि कह दूं अपना दरवाजा बंद रखा करें, मगर फिर 
सोचकर रुक जाता कि वे लोग बुरा मान सकते हैं।या जवाब में यह भी कह सकते हैं 
यह उनकी मर्जी है वे दरवाजा या रखे या बंद।

आखिर एक दिन मैं उनके मुखिया को सुना दिया कि आप लोग लकड़ी वाला दरवाजा पूरे दिन खुला रखते हैं। मेरी बात सुनकर वह कहने लगा 'ऐसा तो हम आपके लिए ही करते हैं'। 

'मेरे लिए ?' मै हैरान थाहां आपके ही लिए तो। आप इस फ्लैट में अकेले रहते हैं।आपकी उम्र लगभग 80 बरस की है, हम अपना दरवाजा इसलिए खुला रखते हैं ताकि यह पता लगता रहे कि कोई गलत इंसान तो आपके यहां नहीं आया आपके कोई परेशानी या दिक्कत तो नहीं और जरूरत पड़ने पर हम आपकी मदद कर सकें
उनका जवाब सुनकर मैं अवाक रह गया कुछ बोल ही नहीं पाया

सही पड़ोसी पहचान ही नहीं पाया

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