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बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

तेज़ होती हुई साँसें उसकी................ परवीन शाकिर

चेहरा मेरा था निगाहें उसकी 
खामोशी में भी वो बातें उसकी

मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गई
शेर कहती हुई आँखें उसकी 

शोख लम्हों का पता देने लगी 
तेज़ होती हुई साँसें उसकी 

ऐसे मौसम भी गुज़ारे हमने 
सुबहें जब अपनी थीं शामें उसकी 

ध्यान में उसके ये आलम था कभी 
आँख महताब की यादें उसकी
24 नवम्बर 1952 - 26 दिसम्बर 1994
-परवीन शाकिर


रविवार, 3 सितंबर 2017

तेज़ होती हुई साँसें...परवीन शाकिर

24 नवम्बर 1952 - 26 दिसम्बर 1994
चेहरा मेरा था निगाहें उसकी 
खामोशी में भी वो बातें उसकी

मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गई
शेर कहती हुई आँखें उसकी 

शोख लम्हों का पता देने लगी 
तेज़ होती हुई साँसें उसकी 

ऐसे मौसम भी गुज़ारे हमने 
सुबहें जब अपनी थीं शामें उसकी 

ध्यान में उसके ये आलम था कभी 
आँख महताब की यादें उसकी

-परवीन शाकिर

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