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एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है
पड़ोसन चीनी मांगने आई… बहू ने मना कर दिया शाम का समय था। आंगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रसोई में नई-नई बहू नेहा रात के खाने की तैयारी ...
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इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
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सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...
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खामोश जुबाँ खामोश नजर खामोश बसर खामोश ! खामोशी के मंजर का हर पल है खामोश ! चाँद - चाँदनी मौन साधक से शबनम भी बहती ...
