सुख शांति का वास रहे और वृद्धि हो खुशहाली में,
जो चाहो वो सब मिल जाये अबके बरस दिवाली में,
यदि मिट्टी के कुछ दीपक हम अबके बरस जलायेंगे,
तो किसी गरीब की कुटिया में खुशियों के फूल खिलाएंगे,
अथक परिश्रम करते है जो ठंडी,गर्मी,पानी में,
कहीं ना टूटे उनके सपने हम सब की नादानी में,
कितने सपने,कितनी आशा एक दीपक में बस जाती है,
उम्मीद का सूरज उगता है जब भी दिवाली आती है,
धन दौलत है पास तुम्हारे,उनकी झोली खली है,
भूल ना जाना भाई मेरे उनके घर भी दिवाली है,
पकवानों की चाह नहीं पर पूड़ी तो हो थाली में,
अपना भी सहयोग हो शामिल उन सब की खुशहाली में,
- नीतू ठाकुर
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