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शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सो गई आके माँ के पल्लू में...मनी यादव

छोड़ दो आसमाँ के पल्लू में
रह नहीं सकता जाँ के पल्लू में

खेलते खेलते थक कर अब धूप
सो गई आके माँ के पल्लू में

धड़कनें आती जाती रहती हैं
इस दिल-ए-मेहरबाँ के पल्लू में

मेरी आवाज़ बेघर थी आख़िर
घर मिला दास्ताँ के पल्लू में

दुश्मनी दोस्ती दोनों रहतीं
एक बस इस ज़ुबाँ के पल्लू में
- मनी यादव

शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

चाँद आ तो गया मेरे घर में....मनी यादव

मौत को अपना आशना रक्खें
ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें

चाँद आ तो गया मेरे घर में
चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें

शाइरी सुनना कोई खेल नहीं
शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें

प्यास दरिया बुझा नही सकता
इसलिए पास में कुआँ रक्खें

पेड़ तहज़ीब का पड़ा जख़्मी
पूर्वजों इसपे कुछ दुआ रक्खें

तू बुलंदी दिखा रहा मुझको
ज़ेब में हम तो आसमाँ रक्खें
-मनी यादव

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

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