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बुधवार, 17 जनवरी 2018

जिंदगी भारी बहुत है...अलका गुप्ता

फूँकने को एक..चिंगारी बहुत है !
मौत से तो..जिंदगी भारी बहुत है !!

सीख अब हमने लिया है सबक यारा..
जिंदगी मीठी कभी खारी बहुत है !!

ऐहसासों में अब...दम कहाँ खुदाई !
आज रुख हर तरफ़..बाजारी बहुत है !!

धुंध हटती क्यूँ नहीं...उस..वेहया से !
खून में..जो...आज...गद्दारी बहुत है !!

सिलसिला मिलने नहीँ देता जभी तो...
गुफ्तगू में एक लाचारी बहुत है !!

आइना तो झूठ बोला ही नहीं था !
उस दिखावे में अदाकारी बहुत है!!

शोखियाँ जर-जर हुईं हैं भारती क्यूँ ?
नोचता अब फ़कत फुलवारी बहुत है !!

-अलका गुप्ता

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

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