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एक बकरा और एक घोड़ा
एक पठान के पास एक बकरा और एक घोडा था। जिन्हें वो बहुत प्यार करता था। एक बार अचानक घोडा बीमार पड़ गया और बैठ गया। वो अब चल फिर नहीं सकता ...
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इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
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न करना गुमान कामयाबी का चढता सूरज ढलते देखा । बुझ गया हो दीप न डरना प्रयासों से फिर जलते देखा । हीरा पड़ा रह जाता कई बार ...
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सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...

सूखने के बाद तो दरारें पड़ जाती है।
जवाब देंहटाएंनम भूमि में ही तो उजेंगी नई सोच नई तरकीबें
मानने की
मनाने की।
सुंदर नज्म
सूखने के बाद तो दरारें पड़ जाती है।
जवाब देंहटाएंनम भूमि में ही तो उजेंगी नई सोच नई तरकीबें
मानने की
मनाने की।
सुंदर नज्म
मैं सच में मानता हूँ कि आपकी नज़्में सिर्फ शब्द नहीं बनातीं, वो पूरा माहौल खड़ा कर देती हैं। मैं उन भीगे लफ़्ज़ों में एक तरह की जिद महसूस करता हूँ जैसे दिल कह रहा हो, “मैं हर हाल में सच बोलूँगा।
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