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शनिवार, 16 सितंबर 2017

कुछ खबर ही नहीं लापता कौन है.............नवीन मणि त्रिपाठी


212 212 212 212
पूछिये मत यहां गमज़दा कौन है ।
पूछिये मुद्दतों से हँसा कौन है ।।

वो तग़ाफ़ुल में रस्में अदा कर गया ।
कुछ खबर ही नहीं लापता कौन है ।।

घर बुलाकर सनम ने बयां कर दिया ।
आप आ ही गये तो ख़फ़ा कौन है ।।

इस तरह कोई बदला है लहजा कहाँ ।
आपके साथ में रहनुमा कौन है ।।

आज तो बस सँवरने की हद हो गई ।
यह बता दीजिए आईना कौन है ।।

अश्क़ आंखों से छलका तो कहने लगे ।
ढल गई उम्र अब पूंछता कौन है ।।

यूँ भटकता रहा उम्र भर इश्क में ।
पूछता रह गया रास्ता कौन है ।।

मैंने ख़त में उसे जब ग़ज़ल लिख दिया ।
फिर सवालात थे ये लिखा कौन है ।।

दीजिये मत खुदा की कसम बेसबब ।
अब खुदा को यहां मानता कौन है ।।

है जरूरी तो घर तक चले आइये ।
आप क्या हैं इसे जानता कौन है ।।

- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस पटल पर आप ने मुझे स्थान दिया । हार्दिक आभार के साथ नमन ।

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  2. है जरूरी तो घर तक चले आइये ।
    आप क्या हैं इसे जानता कौन है ।।

    बहुत बहुत शानदार त्रिपाठी जी। wahhhhhhhhh। बहुत ख़ूब

    जवाब देंहटाएं

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