फ़ॉलोअर

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मेरा सलीका मेरे साथ

मेरा सलीका

भाभी घर छोड़कर जा रही थी
उसने अलमारी में अपनी जगह खाली की 
चाबियां मेज पर रक्खी, मां के लिए दवा रखी,
दरवाजे के पास के बिखरे जूते करीने से रखे 
और जाते-जाते गंदे बर्तन भी धो दिए

दरवाजे खड़े भैया ने पूछा इतनी नाराजगी के बाद ये सब?

रिश्ता छोड़ रही हूं,अपना सलीका नहीं
यह कह कर मुस्कुराते हुए चली गई

-मेहनाज़ मंसूरी

4 टिप्‍पणियां:

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

  पड़ोसन चीनी मांगने आई… बहू ने मना कर दिया शाम का समय था। आंगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रसोई में नई-नई बहू नेहा रात के खाने की तैयारी ...