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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

“ज़माने में यही होता रहा है”.....अखिल भंडारी


किनारे पर खड़ा क्या सोचता है 
समुंदर दूर तक फैला हुआ है 

ज़मीं पैरों से निकली जा रही है 
सितारों की तरफ़ क्या देखता है 

चलो अब ढूँढ लें हम कारवाँ इक 
बड़ी मुश्किल से ये रस्ता मिला है 

हमें तो खींच लाई है मुहब्बत
तुम्हारा शहर तो देखा हुआ है 

नये कपड़े पहन के जा रहे हो 
वहाँ कीचड़ उछाला जा रहा है 

वहाँ तो बारिशें ही बारिशें हैं 
यहाँ कोई बदन जलता रहा है 

कभी उस को भी थी मुझ से मुहब्बत 
ये क़िस्सा अब पुराना हो चुका है 

बुरे दिन हैं सभी मुँह मोड़ लेंगे 
“ज़माने में यही होता रहा है”
-अखिल भंडारी

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

मेरे गीतों मेरी ग़ज़लों को रवानी दे दे....चाँद शुक्ला ’हदियाबादी’


मेरे गीतों मेरी ग़ज़लों को रवानी दे दे
तू मेरी सोच को एहसास का पानी दे दे 

मुद्दतों तुझसे मैं बिछड़ा हूँ मोहबत के लिये
ख़वाब मैं आ के मुझे याद पुरानी दे दे 

थक गया गर्दिशे दौरां से यह जीवन मेरा 
मेरे रहबर मुझे मंज़िल की निशानी दे दे

तेरी आँखों में बिछा रखीं हैं पलकें मैंने 
अब इन आँखों को मुससर्रत का तू पानी दे दे

"चाँद" निकला तो चकोरी ने कहा रूठे हुए
साथ अपने तू मुझे नकले मकानी दे दे 
-चाँद  शुक्ला ’हदियाबादी’

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

तेरे प्रेम में, तेरी प्रीत में........अयान सुरोलिया


तेरी जुल्फों की छाँव में 
तेरी प्यार भरी निगाह में
तेरे हँसने में, तेरे रोने में
तेरा पल भर के लिए, मेरी बाहों में सोने में 
मैं जीवन पा लूँगा, सोचा न था।

तेरे प्रेम में, तेरी प्रीत में
तेरी हार में, तेरी जीत में
तेरी चहकती हुई वाणी के
मधुप्रिय संगीत मे
मैं जीवन पा लूँगा, सोचा न था।

तेरे हौले से मेरे गालों को चूमने में
तेरे डांटने में,तेरे छूने में
मेरे शीतरात्री जैसे, जीवन के सूने में
मैं जीवन पा लूँगा, सोचा न था।

तेरे प्यार से मेरे गालों को सहलाने में
तेरे रूख को परेशां करती, उन जुल्फों को हटाने में
तेरी मीठी सी शरारत में
तेरे आलिंगन की हरारत में
मैं जीवन पा लूँगा, सोचा न था।

हमारे प्रेम के प्रतीक,उन चादर की सिलवटों में
तुझसे लड़ने पर,उन बेचैन रातों की करवटों में,
तेरे होठों के ऊपर के तिल में
मेरे करीब आने पर, तेरे जोरों से धड़कते दिल में
मैं जीवन पा लूँगा, सोचा न था।

तुम साधना हो मेरी
तुम प्रीत हो मेरी
मेरी खोयी हुई नाव की साहिल हो तुम
मेरी इच्छाओ का अंत है,अगर हासिल हो तुम

न सोना हो तुम , ना ही हूर हो
तुम मेरा कोहिनूर हो
देखा है तुम्हे, छूआ है तुम्हे
महसूस भी किया है
फिर भी न जाने क्यू लगता है
तुम कल्पना हो मेरी।

जो जीवन पाया है तुमसे
जिसे ना सोचा था, ना जिसकी उम्मीद थी
उस जीवन की 
तुम प्रेरणा हो मेरी।

-अयान सुरोलिया

रविवार, 11 फ़रवरी 2018

"परमेश्वरा " (हाइकु ) ...कुसुम कोठारी

तमो वितान
तम हर, दे ज्योति
पालनहार।

निशा थी काली
भोर की फैला लाली
हे ज्योतिर्मय।

शंकित मन
शंका हर , दे वर
जगत पिता।

रुठा है भाग्य
शरण तेरी आये
वरद दे हस्त।

आया शरण
भव नाव डोलत 
परमेश्वरा ।

मंजिल भूले
राह नही सूझत
दे दिशा ज्ञान।

-कुसुम कोठारी 

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

बस देखता रहूंगा....राकेश पत्थरिया 'सागर'


तेज हवाओं में
जब झांकता हूँ खिड़की से उस ओर
तो इन पेड़ों के नृत्य में
तलाशता हूँ कुछ,
उसी समय आसमान में
बहते बादलों में
मिलता है एक अक्स
हू-ब-हू तुम जैसा
आँखें, नाक, कान और बाल।
और वो अक्स
बादलों पर सवार होकर
जा रहा है दूर
बहुत दूर
उसके पीछे भागना मेरे बस में कहां
बस देखता रहूंगा
तब तक जब तक
आँखों से ओझल नहीं हो जाता।

-राकेश पत्थरिया 'सागर'

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

गुलमोहर (हाइकु).....ज्योत्सना प्रदीप


1.
गिरधर का 
मुकुट-धरोहर 
गुलमोहर।
2.
ताप सहता
पीड़ा ना कहता
गुलमोहर।
3.
मधु का स्रोत
खुशी से ओत-प्रोत
ये कृष्णचूड़
4.
मोह लेता रे
मोहन को भी यह
गुलमोहर।
5.
ये स्वर्ग-पुष्प
सुने राग-बहार 
मधुमक्खी का।
-ज्योत्सना प्रदीप

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

पूछ रहे है वो हमसे .......डॉ. इन्दिरा गुप्ता

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पूछ रहे है वो हमसे 
रवायते - ए - मौहब्बत क्या होगी 
हमने लब खमोश रखे 
देखै उनकी इनायत क्या होगी ! 

दस्तुरे वफा वो पूछ रहे 
तो इश्केदारी क्या होगी 
बहुत हुआ कहना सुनना 
उनसे दुनियॉ दारी ही होगी ! 

बज़्म भी है और तुम भी है 
और हम भी है खामोश सनम 
शोर भरी इस महफिल मै 
फिर इश्क की कीमत क्या होगी ! 

डॉ. इन्दिरा गुप्ता ✍

एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है

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