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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

मेरे गीतों मेरी ग़ज़लों को रवानी दे दे....चाँद शुक्ला ’हदियाबादी’


मेरे गीतों मेरी ग़ज़लों को रवानी दे दे
तू मेरी सोच को एहसास का पानी दे दे 

मुद्दतों तुझसे मैं बिछड़ा हूँ मोहबत के लिये
ख़वाब मैं आ के मुझे याद पुरानी दे दे 

थक गया गर्दिशे दौरां से यह जीवन मेरा 
मेरे रहबर मुझे मंज़िल की निशानी दे दे

तेरी आँखों में बिछा रखीं हैं पलकें मैंने 
अब इन आँखों को मुससर्रत का तू पानी दे दे

"चाँद" निकला तो चकोरी ने कहा रूठे हुए
साथ अपने तू मुझे नकले मकानी दे दे 
-चाँद  शुक्ला ’हदियाबादी’

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