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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

जो तुम आ जाते एक बार...महादेवी वर्मा

जो तुम आ जाते एक बार
कितनी करुणा कितने सँदेश,
पथ में बिछ जाते बन पराग,
गाता प्राणों का तार-तार
अनुराग-भरा उन्माद-राग;
आँसू लेते वे पद पखार !
जो तुम आ जाते एक बार !

हँस उठते पल में आर्द्र नयन
घुल जाता ओठों से विषाद,
छा जाता जीवन में वसंत
लुट जाता चिर-संचित विराग;
आँखें देतीं सर्वस्व वार |
जो तुम आ जाते एक बार !
- महादेवी वर्मा 

2 टिप्‍पणियां:

  1. कालजयी कवियित्री की हृदयस्पर्शी रचना...इनके सम्मान में कुछ कहने का भी साहस नहीं।

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  2. जो तुम आ जाते एक बार हृदयस्पर्शी रचना..

    जवाब देंहटाएं

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