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एक छोटी सी मदद, दिलों के बीच इतना बड़ा रिश्ता बना देती है
पड़ोसन चीनी मांगने आई… बहू ने मना कर दिया शाम का समय था। आंगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रसोई में नई-नई बहू नेहा रात के खाने की तैयारी ...
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इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
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सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...
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न करना गुमान कामयाबी का चढता सूरज ढलते देखा । बुझ गया हो दीप न डरना प्रयासों से फिर जलते देखा । हीरा पड़ा रह जाता कई बार ...

जा रहे चाँद पे, सितारों पे
जवाब देंहटाएंदिल से दिल तक चला नहीं जाता।
बेमिसाल। वाह जिन्दावाद विनीता जी।
वाह !
जवाब देंहटाएंख़ूबसूरत अभिव्यक्ति।
बहुत सुन्दर रचना ,आभार "एकलव्य"
जवाब देंहटाएंवाह!लाज़वाब
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