
पूछ रहे है वो हमसे
रवायते - ए - मौहब्बत क्या होगी
हमने लब खमोश रखे
देखै उनकी इनायत क्या होगी !
दस्तुरे वफा वो पूछ रहे
तो इश्केदारी क्या होगी
बहुत हुआ कहना सुनना
उनसे दुनियॉ दारी ही होगी !
बज़्म भी है और तुम भी है
और हम भी है खामोश सनम
शोर भरी इस महफिल मै
फिर इश्क की कीमत क्या होगी !
डॉ. इन्दिरा गुप्ता ✍







