फ़ॉलोअर
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
मेरा सलीका मेरे साथ
मेरा सलीका भाभी घर छोड़कर जा रही थी उसने अलमारी में अपनी जगह खाली की चाबियां मेज पर रक्खी, मां के लिए दवा रखी, दरवाजे के पास के बिखरे जूते ...
-
इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
-
सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...
-
न करना गुमान कामयाबी का चढता सूरज ढलते देखा । बुझ गया हो दीप न डरना प्रयासों से फिर जलते देखा । हीरा पड़ा रह जाता कई बार ...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (07-02-2019) को "प्रणय सप्ताह का आरम्भ" (चर्चा अंक-3240) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पाश्चात्य प्रणय सप्ताह की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
गिफ्ट देने का नविनतम तरीका पसंद आया।
जवाब देंहटाएंमिठाई भी ऐसे ही भेज दें ...
जवाब देंहटाएं