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बूंद भर खुशबू
बूंद भर खुशबू हर त्योहार दादी संदूक से एक छोटी -सी इत्र की शीशी निकालती। उंगली पर बस एक बूंद लगाती और शीशी वापस रख देती। मैं हंस कर पू...
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इक अक्श हूँ, ख्यालों में ढल जाऊँगा मैं, सोचोगे जब भी तुम, सामने नजरों के आ जाऊँगा मैं... जब दरारें तन्हा लम्हों में आ जाए, वक्त के कं...
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न करना गुमान कामयाबी का चढता सूरज ढलते देखा । बुझ गया हो दीप न डरना प्रयासों से फिर जलते देखा । हीरा पड़ा रह जाता कई बार ...
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सुना -अनसुना कर हर पल गुजरता क्या किस्सा कहे उनकी बेरुखी का ! उमर का सफीना साहिल पे डूबा जमाना भी था तब दिल्लगी का ! स...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (10-02-2018) को "चोरों से कैसे करें, अपना यहाँ बचाव" (चर्चा अंक-2875) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंबेहद उम्दा हायकु👌
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबधाई