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मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

दिन आजकल धूप से......श्वेता सिन्हा


दिन आजकल धूप से परेशान मिलती है,
साँवली शाम ऊँघती बहुत हैरान मिलती है।

रात के दामन पर सलवटें कम ही पड़ती है ,
टोहती चाँदनी से अजनबी पहचान मिलती है।

स्याह आसमां पर सितारे नज़्म बुनते है जब,
चाँद की वादियों में तहरीरें बेजुब़ान मिलती है।

दिल भटकता है जब ख़्वाहिशों के जंगल  में,
फुनगी पर ख़ाली हसरतों की दुकान मिलती है।

अधजले चाँद के टुकड़े से लिपटे अनमने बादल,
भरी यादों की गलियाँ दर्द से वीरान मिलती है।


           #श्वेता🍁

10 टिप्‍पणियां:

  1. दिल की बेताबियां बेजार मिलती है श्वेता को जब पढो लाजवाब मिलती है लाजवाब उम्दा गजल।

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  2. वाह...
    क्या बात है....
    बेहतरीन....
    सादर........

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  3. बहुत लाजवाब रचना आदरणीय श्वेता जी ----- हमेशा की तरह | अनंत शुभकामनाएं आपको |

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