समर्थक

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

मील का पत्थर नहीं देखा.......बशीर बद्र


आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा

बेवक़्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं,
तुमने मेरा काँटों-भरा बिस्तर नहीं देखा

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा
- बशीर बद्र

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह्ह्ह....बशीर बद्र की शानदार बेमिसाल गज़ल क्या कहने...।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शायर डॉ. बशीर बद्र साहब की कालजयी ग़ज़ल साझा करने के लिए आपका हार्दिक आभार।
    ग्वालियर में कई बार इस महान शायर को रूबरू सुना और सृजन की गहराइयों को समझने का मौका मिला।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-09-2017) को "कैसा हुआ समाज" (चर्चा अंक 2722) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  4. उम्दा ग़ज़ल
    आभार पढ़वाने के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  5. बशीर बद्र जी की ग़ज़ल हर नए लिखने वाले के लिए वो हस्ताक्षर है जो उसे हमेशा अपनी लेखनी सुधारने की राह दिखाती है. उनकी इस ग़ज़ल को कई बार पढ़ चुकी हूँ लेकिन हर बार ये मरे सामने नए मायने खोल कर रख देती है. इसे साझा करने के लिए बहुत बहुत आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर गजल । साझा करने हेतु आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. उस्तादों को पढ़ के जो आनद मिलता है वो कहीं नहीं ... आदाब बशीर साहब के लिए ...

    उत्तर देंहटाएं

आँसुओं से लिखी ग़ज़ल...नीतू ठाकुर

आँसुओं से लिखी ग़ज़ल हमने,  मेरे हमदम तेरी कहानी है, अश्क़ टपके जो मेरी आँखों से,  लोग सोचेंगे ये दीवानी है,  वादा करना और मुकर ज...