समर्थक

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

अहसास पहले खो गए....नीतू राठौर


आपसे बिछड़े तो इतने खो गए
हम थे किसके और किसमें खो गए।

आपकी तस्वीर क्यूँ दिखती नहीं
प्यार में दिल, दिल से मिलते खो गए।

क्यूँ पिरोया प्यार को बनकर मोती
बिखरें आँगन में जिसके खो गए।

ज़िन्दगी हमनें सँवारी थी तेरी
मंजिलें आई तो रस्ते खो गए।

आप हाथों की लकीरों में थी मगर
"नीतू" के अहसास पहले खो गए।
-नीतू राठौर

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 08 सितम्बर 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. युवामन की ज़द्दोज़हद से भरी अभिव्यक्ति। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. थोड़े ही शब्द बहुत कुछ बयान कर जाते हैं

    उत्तर देंहटाएं

आँसुओं से लिखी ग़ज़ल...नीतू ठाकुर

आँसुओं से लिखी ग़ज़ल हमने,  मेरे हमदम तेरी कहानी है, अश्क़ टपके जो मेरी आँखों से,  लोग सोचेंगे ये दीवानी है,  वादा करना और मुकर ज...