कुछ बातों को करीने से लगाकर,
वो जाता है अक़्सर मुझे बहलाकर ।
कीमती हैं मेरे पास यादें तुम्हारी
इनको रखा है त़ह पे त़ह लगाकर ।
खोज़ना है किसी अपने को पर
गया है वो चेहरे पे चेहरा लगाकर ।
बेगाना तो नहीं पर कैसे कहूं अपना,
जो गया है मुझे अज़नबी बनाकर ।
-सीमा 'सदा'
बहुत सुंदर,लाज़वाब👌👌
जवाब देंहटाएंक्या बात है .... आभार आपका 👍👍
जवाब देंहटाएंतह पे तह लगाकर! .... सुन्दर!
जवाब देंहटाएंखोज़ना है किसी अपने को पर
जवाब देंहटाएंगया है वो चेहरे पे चेहरा लगाकर ।.......
वाह ! कमाल का है जज़्बे का मुज़ाहिरा। बधाई।
मन को छु लेने वाले शब्द !!!!!!!!!!
जवाब देंहटाएंसुन्दर।
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