
संकल्प
मन विचलित
मत करना अपना
कुछ विलंब जो
हो जाये,
कुछ नही
संसार मे ऐसा
जो तू ठान के
ना कर पाए,
ज्ञान तुझे हो
लक्ष्य का अपने
कसकर कमर
जो तू चल जाये,
फिर कुछ नही है
संसार मे जो तू
चाह के ना कर पाये,
कमी कहीं रह जाए
तो पुनः प्रयास करें
मन निराश न कर
अपना,दुगुना फिर
उत्साह भरे,
माना बड़ी मुश्किल
डगर है,
बहुत कठिन
तेरा सफर है,
पर तु सोच
जरा मन में
हमने क्यूँ
मानव तन पाए
मन विचलित
मत करना अपना
कुछ विलंब
जो हो जाए
है तुझमे
इतना बल
जगा अपनी
धमनीऔर शिराएं
करले दृढ़ "संकल्प"
बना स्वयं
हस्तरेखाएँ
दीपाली ठाकुर (दीपशिखा)
रायपुर छत्तीसगढ़