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मंगलवार, 7 नवंबर 2017

मीरा तुझमें आन बसी है ............हबीब 'जालिब'

तेरे मधुर गीतों के सहारे 
बीते हैं दिन रैन हमारे 
तेरी अगर आवाज़ न होती 
बुझ जाती जीवन की ज्योति 
तेरे सच्चे सुर हैं ऐसे 
जैसे सूरज-चाँद-सितारे 

क्या क्या तूने गीत हैं गाये
सुर जब लागे मन झुक जाए 
तुमको सुनकर जी उठते हैं 
हम जैसे दुःख-दर्द के मारे 

मीरा तुझमें आन बसी है 
अंग वही है रंग वही है 
जग में तेरे दास हैं इतने 
जितने हैं आकाश में तारे 
तेरे मधुर गीतों के सहारे 
बीते हैं दिन रैन हमारे


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