आपसे बिछड़े तो इतने खो गए
हम थे किसके और किसमें खो गए।
आपकी तस्वीर क्यूँ दिखती नहीं
प्यार में दिल, दिल से मिलते खो गए।
क्यूँ पिरोया प्यार को बनकर मोती
बिखरें आँगन में जिसके खो गए।
ज़िन्दगी हमनें सँवारी थी तेरी
मंजिलें आई तो रस्ते खो गए।
आप हाथों की लकीरों में थी मगर
"नीतू" के अहसास पहले खो गए।
-नीतू राठौर
