बेबसी इस क़दर हुई बेबस
अश्क़ बनकर बहा नहीं जाता
हमने माँगा ही क्या, जो दे ना सके
सब्र से अब रहा नहीं जाता
उनकी ऊँची बहुत दुकान सही
पीर मौला कहा नहीं जाता
फ़र्क़ दिल में रहा, दिमाग में भी
उम्र का फ़ासला नहीं जाता
जा रहे चाँद पे, सितारों पे
दिल से दिल तक चला नहीं जाता
- विनीता तिवारी
जा रहे चाँद पे, सितारों पे
जवाब देंहटाएंदिल से दिल तक चला नहीं जाता।
बेमिसाल। वाह जिन्दावाद विनीता जी।
वाह !
जवाब देंहटाएंख़ूबसूरत अभिव्यक्ति।
बहुत सुन्दर रचना ,आभार "एकलव्य"
जवाब देंहटाएंवाह!लाज़वाब
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